ये हैं दुनिया के 10 सबसे घातक वायरस
ये हैं दुनिया के 10 सबसे घातक वायरस
कोविड-19 (Covid-19)
कुछ दशकों में कई नए तरह के वायरस जानवरों से इंसानों में आए, जो बेहद खतरनाक साबित हुए और हजारों जानें लीं. कोविड-19 (Covid-19) भी इन्हीं में से एक है, जिसका स्त्रोत अभी पक्का नहीं हो सका है. लेकिन कोरोना (corona) ही नहीं, इसके अलावा भी कई ऐसे ह्यूमन वायरस (human virus) हैं, जो इससे कहीं ज्यादा घातक हैं.
साल 2014 से 2016 के दौरान इबोला आउटब्रेक हुआ. पश्चिमी अफ्रीका में फैली इस वायरल बीमारी से संक्रमित 90 प्रतिशत से ज्यादा लोगों की जान चली गई. इसे इबोला फैमिली का सबसे जानलेवा वायरस माना गया. अब कोरोना वायरस दुनिया के लगभग सभी देशों के 24 लाख लोगों को संक्रमित कर चुका है. बेहद संक्रामक इस बीमारी से 1 लाख 65 हजार जानें जा चुकी हैं. जानते हैं, ऐसे ही 10 सबसे घातक पैथोजन्स (वायरस) के बारे में.
मारबर्ग वायरस
साल 1967 में मारबर्ग वायरस की खोज हुई थी. जर्मनी में एक लैब में काम करने वाले लोगों में ये वायरस देखा गया. पता चला कि संक्रमित लोग युगांडा से आए बंदरों के संपर्क में आए थे. मार्रबर्ग वायरस से संक्रमित में इबोला वायरस की तरह ही लक्षण दिखते हैं, जैसे आंतरिक रक्तस्त्राव होना, तेज बुखार और ऑर्गन फेल होने के साथ मौत. कांगो में भी बाद में ये बीमारी दिखी, जिसमें डेथ रेट 80% से ज्यादा थी
इबोला वाइरस
अब बारी है Ebola virus की. साल 1976 में रिपब्लिक ऑफ सूडान और कांगो में इसका संक्रमण दिखा था. शरीर के फ्लूइड जैसे, खांसी, खून, बलगम के जरिए फैलने वाला ये वायरस बेहद घातक है. वहीं इबोला फैमिली के कई वायरस इंसानों पर कोई असर नहीं डालते हैं.

रेबिस
रबीस के वायरस भी इसी श्रेणी में आते हैं. कुत्ते, बिल्ली, सुअर से लेकर कई तरह के चौपायों के काटने पर इसका डर रहता है. साल 1920 में सबसे पहले इस वायरस का पता चला. बोस्टन यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर एलके मुहलबेर्गेर के मुताबिक ये आज तक पता चले वायरसों में सबसे घातक हो सकता है अगर समय पर इलाज न मिले. सीधे मस्तिष्क पर असर करने वाला ये वायरस अब भी भारत और अफ्रीकन देशों की बड़ी समस्या है
एचआईवी
एचआईवी का वायरस भी घातक वायरसों की श्रेणी में है, जिसने 1980 के बाद से अब तक 32 मिलियन से ज्यादा जानें ली हैं. WHO के अनुसार अफ्रीकन देशों में हर 25 में से 1 वयस्क इससे संक्रमित है. यानी दुनिया में एक तिहाई लोग इसी वायरस के साथ रह रहे हैं. इसके लिए हालांकि एंटी वायरस दवाएं भी हैं, जिसे लेने पर बीमार शख्स सालों सामान्य जिंदगी जी सकता है.
हंता वायरस
हंता वायरस (Hantavirus) नाम के इस जानलेवा वायरस की खोज साल 1993 में हुई, जब अमेरिका में एक कपल की संक्रमण के कुछ ही दिनों के भीतर मौत हो गई. ये वायरस वैसे इंसानों से इंसानों में नहीं फैलता है, बल्कि संक्रमित चूहे के संपर्क में आने पर इसका संक्रमण फैलता है. बीमार चूहे के फ्रेश यूरिन के संपर्क में आने या उसकी लार को छूने से ऐसा होता है. यहां तक कि संक्रमित जीव के आसपास की हवा में भी ये वायरस रहते हैं और इससे भी इंसानों को ये बीमारी हो सकती है.

इन्फ्लुएंजा
इन्फ्लुएंजा यानी फ्लू के वायरस भी काफी खतरनाक हो सकते हैं. WHO के अनुसार एक टिपिकल फ्लू सीजन में 5 लाख से ज्यादा मौतें हो सकती हैं. अबतक का सबसे घातक फ्लू Spanish flu को माना जाता है, जिससे 50 मिलियन से भी ज्यादा मौतें हुईं.
डेंगू
फिलीपींस और थाइलैंड में साल 1950 में सबसे पहले Dengue फीवर दिखा था. अब दुनिया का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इससे प्रभावित हो चुका है. WHO की मानें तो मच्छरों से फैलने वाली ये बीमारी सालाना 50 से 100 मिलियन लोगों को प्रभावित करती है. हालांकि इसमें मौत की दर दूसरे वायरस की अपेक्षा कम है लेकिन अगर इलाज न मिले तो 20 प्रतिशत मामलों में मरीज की मौत हो सकती है. इसकी वैक्सीन खोजी जा चुकी है लेकिन इसकी शर्त ये है कि जिसे वैक्सीन दी जा रही है, वो पहले कभी डेंगू संक्रमित हो चुका हो. ऐसा न होने पर सीवियर डेंगू का खतरा रहता है, जिसमें जान भी जा सकती है.
रोतावीरस
रोतावीरस भी काफी खतरनाक विषाणुओं में शुमार है. नवजात और छोटे बच्चों में इसकी वजह से सीवियर डायरिया हो जाता है. भारत में भी ये रोटावायरस बड़ी समस्या है, खासकर ग्रामीण इलाकों में, जहां साफ पानी की व्यवस्था नहीं है. साल 2008 में WHO के मुताबिक दुनियाभर में 453,000 से ज्यादा बच्चों की इस वायरस के संक्रमण से जान गई थी. हालांकि अब इसकी वैक्सीन आ चुकी है.
सार्स
साल 2003 में सार्स (SARS-CoV) दिखा. चीन से इसकी शुरुआत हुई और जल्दी ही दो दर्जन से अधिक देशों में इसके मरीज पाए गए थे. इससे 774 लोगों की मौत हुई थी. हालांकि अब तक ये पता नहीं लग सका कि सार्स किस जानवर से फैला था लेकिन कई वैज्ञानिकों का मानना है कि बिल्ली का मांस खाने की वजह से ये इंसानी शरीर तक पहुंचा. इसकी कोई वैक्सीन या पक्का इलाज नहीं है.

मर्स
इसके बाद साल 2012 में आया मर्स (MERS-CoV ). इसे Middle East respiratory syndrome कहते हैं. सऊदी अरब में फैली इस जानलेवा बीमारी का स्त्रोत ऊंट थे. इसमें डेथ रेट 40% है, जो कि जानवरों से इंसानों में पहुंचे वायरस में सबसे घातक माना जा रहा है. इससे बचान के लिए भी अब तक टीका नहीं बन सका है.
कोविड-19
इसके बाद बारी आती है कोविड-19 की, जो coronavirus परिवार का सबसे नया वायरस माना जा रहा है. इसे SARS-CoV-2 भी कहते हैं. चीन के वुहान से बीते साल दिसंबर में दिखा ये वायरस अब दुनिया के लगभग हर देश को अपनी चपेट में ले चुका है और 24 लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं. इसके स्त्रोत का कोई पक्का प्रमाण नहीं है. माना जा रहा है कि संक्रमित चमगादड़ या कुत्ते से ये इंसानों तक पहुंचा.

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